छत्तीसगढ़
कलेक्टर ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण पर दिए दिशा-निर्देश
Shantanu Roy
27 April 2026 10:24 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। जिले में प्राचीन धरोहरों के संरक्षण की दिशा में प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आज प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रहकर्ता राम कुमार वर्मा से मुलाकात कर उनके पास मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पांडुलिपियों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की और इनके संरक्षण को आवश्यक बताया। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि प्राचीन पांडुलिपियां हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दस्तावेजों में इतिहास, ज्ञान और परंपराओं की अमूल्य जानकारी संरक्षित है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
उन्होंने जिले के नागरिकों से भी अपील की कि यदि किसी के पास प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज या ऐतिहासिक सामग्री उपलब्ध है, तो वे इसे जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं या संबंधित क्षेत्र सर्वेयर से संपर्क करें, ताकि उनका सही संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्राप्त पांडुलिपियों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाए और उन्हें चरणबद्ध तरीके से डिजिटलीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि इन पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में परिवर्तित कर निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किया जाए, जिससे यह सामग्री शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम जनता के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके।
इस पहल का उद्देश्य न केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना भी है। इससे शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा और सांस्कृतिक अध्ययन को नई दिशा मिलेगी। कलेक्टर ने यह भी कहा कि डिजिटल संरक्षण से इन दुर्लभ दस्तावेजों के नष्ट होने का खतरा कम होगा और इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक संरक्षण अभियान बताया, जिसमें समाज की भागीदारी भी जरूरी है। प्रशासन द्वारा इस दिशा में जल्द ही विशेष अभियान चलाने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक पांडुलिपियों को एकत्रित कर उनका संरक्षण किया जा सके। इस पहल को जिले में सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद मिलेगी।
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